Emergence of Dalit Pop Music Culture

Dalit Singer Ginni Mahi at her concert | Instagram: @ginni.mahi

लक्ष्मण सिंह

देश   में दलित गीतों की एक नई परंपरा शुरु हो गई है।ये  दलित गीत दलितों के स्वाभिमान को बढ़ाने के लिए प्रयोग किए जा रहे हैं। दलित गायको एवं कलाकारों की  एक नई पौध  खड़ी  हो गई है। यह सिलसिला पिछले लगभग 6 साल से जयादा  दिखाई दे रहा है कि दलित गायक दलितों की समस्या एवं  दलितों के महापुरुषों के विषय में गाना गा रहे हैं. गायक परमजीत पम्मा  का कहना है कि  उन्होंने २००९ में  ऑस्ट्रिया में हुयी रविदासी सम्प्रदाय के संत रामानंद जी  हत्या के  बाद  उन्होंने दलितों के विषय में गीत गाने शुरू किये। परमजीत पम्मा का कहना कि  पहले जाट जाति  को देहाती ,मूर्ख समझा  जाता था लेकिन जाट गायको ने अपनी जाति का महिमामंडन करते हुए अनेक गीत गाये।  अब समाज में यह जाट गीत स्वीकार्य हो गए हैं,  एक दिन ऐसे ही दलित गीतों  की स्वीकार्यता सर्वसमाज में होगी और दलितों के प्रति सोच बदलेगी।   यह एक नई संस्कृति की शुरूआत है एक नए कल्चर को बढ़ाने की कोशिश है जैसा कि हम जानते हैं कि कोई भी संस्कृति हो वह सांस्कृतिक प्रतीको पर आधारित होती है दलितों ने भी अपने प्रति को अपने महापुरुषों को इन गीतों में आधार बनाया है. समाजशास्त्री अंतोनियो ग्राम्सी ने कहा था कि कैसी भी विचारधारा का संस्थानिक एवं कल्चरल आधार होता है, यह कल्चरल आइडियोलॉजी ही किसी बड़ी राजनैतिक  शक्ति    के आधारो  में होती है।  इसमे राजनीतिक प्रचार भाषण लोक साहित्य एवं प्रसिद्ध गीत सभी आते हैं। ग्राम्सी  के अनुसार प्रसिद्ध गीत एवं मिथक  भी एक प्रकार की बौद्धिक शक्ति होते हैं। ग्रामसी  ने कहा है कि शासक  वर्ग अपने कल्चरल प्रतीको के माध्यम से ही अपनी प्रभुसत्ता स्थापित करता है। प्रभु सत्ता भौतिक एवं विचारधारा के कारकों का समुच्य होता है जिससे शासक वर्ग अपनी शक्ति को बनाए रखता है.  प्रभु सत्ता भौतिक एवं विचारधारा के कारकों का समुच्य होता है जिससे शासक वर्ग अपनी शक्ति को बनाए रखता है। प्रतिशत के हिसाब से देखा जाए तो पंजाब में दलितों की सबसे बड़ी जनसंख्या है पंजाब में लगभग 28 % दलित है. पंजाब में सबसे ज्यादा गीत जाट जाति के विषय में हैं।  दलितों के  गानों को जाटों का काउंटर कल्चर ही माना जाता है। ऐसे बहुत से गाने हैं जिनमें जाटों की वीरता का और उनके उच्च सामाजिक स्तर का बखान होता है. गायक परमजीत सिंह पम्मा कहते हैं कि हम दूसरी जातियों के गानों पर क्यों नाचे जब हम अपनी जाति के ऊपर बने हुए गानों पर भी नाच  सकते हैं ,उन्हें सुन सकते हैं। पंजाबी की शीर्ष गायिका मिस पूजा भी दलित समाज से हैं. मिस पूजा ने भी रविदास समाज के ऊपर कई  गाने गाएं हैं जिसमें से सबसे प्रसिद्ध है ‘;बेगमपुरा  बसाना है ,सारे कर लो एका। बेगमपुरा एक ऐसी संकल्पना है जिसमें एक ऐसे स्थान की कल्पना है जहां कोई गम नहीं है बिना गम का जो स्थान है वहीं बेगमपुरा है. मिस पूजा के इस गाने के बोल हैं सारे कर लो एक का बेगमपुरा बसाना है. रविदास की बेगमपुरा की संकल्पना यूरोपियन यूटोपिया के समान है, बल्कि उससे भी जयादा  विकसित है क्योंकि रविदास जी के वचन थे कि ”ऐसा चाहूं राज में जहां रहें  सभी प्रसंन्न , मिले सभी को अन्न।  इस प्रकार के गीतों का संवर्धन करने में डेरा सचखंड बल्ला की महत्वपूर्ण भूमिका है डेरा सचखंड बल्ला की स्थापना संत श्री श्रवण दासजी  जी महाराज के द्वारा की गई थी. डेरा सचखंड बल्ला जालंधर जिले में स्थित है डेरा सचखंड बल्ला ने अनेक /cd रिलीज की है जो रविदासिया मिशन के बारे में है. डेरा सचखंड बल्ला से संबद्ध अनेक गायक हैं जो रविदासिया मिशन से जुड़े हुए गीत गाते हैं दलितों के गीतों की एक परंपरा से चल पड़ी है।  आज  up में, हरियाणा में  अनेक दलित गायक  हैं जो डॉ अंबेडकर  ,गुरु  रविदास के बारे में गाने गा रहे हैं दलित समाज के बारे में गाने गा रहे हैं/ अत्याचारों के विरुद्ध संघर्ष कर रहे हैं’. डेरा सचखंड बल्ला वालो ने  गुरु रविदास की वाणी के ऊपर एक कार्यक्रम में बनाया था जिसका नाम था अमृतवाणी गुरु श्री गुरु रविदास की यह कार्यक्रम जालंधर दूरदर्शन पर 2003 प्रसारित हुआ था. एक दलित गायक  रूपलाल धीर की दूसरी एल्बम रिलीज हुई है जिसका नाम है हममर।हम्मर एक आयातित अमेरिकन suv है तो वह उसी के ऊपर आधारित है कि दलित भी हम्मर जैसी गाड़ी रख सकता है। रूप लाल धीर  का कहना है कि हमारा संगीत दलित समर्थक है ना कि किसी जाति के खिलाफ ,चमार शब्द का  उल्लेख गुरुवाणी में मिलता है जब गुरुओं ने हमें सम्मान दिया तो हमें इस पर गर्व क्यों नहीं होना चाहिए। एक गाने के बोल हैं ”वाल्मीकियां दे मुंडे नहीं  डर दे ,मजहबी सिख मुंडे  नहीं  डर -दे।अर्थ स्पस्ट है कि वाल्मीकि जाति के युवक  बहादुर हैं।  ss आजाद पंजाब में इस दलित pop के पायनियर है ss आजाद की पहली एलबम का नाम था

“”अखि  पूत  चमारा दे”” इसका मतलब है चमारो के गर्वीले पुत्र , यह एल्बम सन 2010 में आई थी यह एल्बम कुछ लोगों के अनुसार पुत्र जट्टा दे  के विरुद्ध आई  एल्बम फाइटर् चमार  सन 2011 में रिलीज हुई उस में कुछ ऐसे गीत है जैसे “” हाथ लेकर हथियार जब निकले चमार””  इस एल्बम की लगभग 20000 कॉपियां बिकी। रूप लाल धीर  का कहना है कि रूप लाल धीर  का कहना है कि एक गाना दिखाता है कि एक युवा दलित  लड़का चंडीगढ़ में पड़ रहा है तब एक लडकी उसका ध्यान आकर्षण करने की चेष्टा करती है तो वह चमार लड़का कहता है पढ़ लिख कर मैं बनूंगा sp या dc  या फिर किसी यूनिवर्सिटी का vc.मुझपे तुम्हारा आकर्षण नहीं चलेगा।   .आइडेंटिटी की पहचान की इस लड़ाई में भेदभाव और संघर्ष हो रहा है ऑनलाइन यह बहुत ज्यादा दिखाई देता है youtube पर एक दूसरी जातियों के विरुद्ध नफरत फैलाने वाले वीडियो भी अपलोड किए जा रहे हैं। विदेशो में रहने वाले दलित इस दलित पॉप के सबसे बड़े संरक्षक हैं। गायक पम्मा  सुनराह  का कहना है कि इस चमार पॉप  ने हमारे हौसले  को बढ़ा दिया है यह जाट पॉप का रिएक्शन नहीं है यह दलितों की बात करता है। , उल्लेखनीय है कि पंजाबी के अनेक गायक जैसे हंसराज हंस , दलेर मेहँदी ,मीका , दलित हैं।

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